Home / स्वास्थय / ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी टी टी जैड क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करने के लिये उचित कदम उठाने

ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी टी टी जैड क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करने के लिये उचित कदम उठाने

आगरा: शनिवार 07 फरवरी 2026

जनस्वास्थ्य घातक ‘सूक्ष्म कणों’ को ‘ टी टी जैड के ‘ गेट वे” पर ही रोका जाये

जिला पंचायत अध्यक्ष ने तेरह मोरी और खनुआ बांध की मरम्मत करवा सुचारू करने को कहा

जनपद का फतेहपुर सीकरी विकास खंड राजस्थान से आने वाली धूल भरी हवाओं का गेट वे बना हुआ है,जिसके फलस्वरूप जनस्वास्थ्य घातक अति सूक्ष्म धूलीय कणों [suspended particulate matter (SPM)] का ताज महल पर प्रतिकूल असर पडना जारी है साथ ही जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

यह कहना है जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ मंजू भदौरिया का।सिंचाई मंत्री को पत्र लिखासिविल सोसायटी आफ आगरा के प्रतिनिधियों से अपने कैंप आफिस पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश के सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव को उन्होंने पत्र लिख कर तेरह मोरी बांध की मरम्मत करवाने को लिखा है,जबकि ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी के अध्यक्ष (मंडलायुक्त आगरा) से भी आवश्यक कदम उठाए जाने को निर्देशित करने का आग्रह किया है।

3 फरवरी 2026 लिखे पत्र में जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा है कि जनस्वास्थ्य घातक सूक्ष्म कण (μg/m) राजस्थान की ओर से आने वाली धूल भरी तेज हवाओं के साथ आते हैं और ताजमहल ही नहीं फतेहपुर सीकरी,अछनेरा और अकोला विकासखंड में जन स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रहे हैं।मिल रहा फीडबैक अत्यंत गंभीर ग्रामीण क्षेत्र निवासियों से मिलती रही जानकारियों को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मंजू भदौरिया कि एस पी एम [suspended particulate matter (SPM)] की वायु में मौजूदगी का सर्वेक्षण और उनसे बचाव को कार्यनीति निर्धारित की जाये। उन्होंने कहा है कि राजस्थान के जनपद भरतपुर की ओर से आने वाली प्रदूषित हवाओं में एस पी एम कणों की मौजूदगी जितनी घातक महानगर क्षेत्र के लिये है उतनी ही प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के लिये भी।

अगर राजस्थान से आने वाली हवाओं में 2.5 माइक्रोन(μg/m ) आकार के धूलिय कण हैं तो ये जन स्वास्थ्य के लिये अत्यंत घातक हैं ओर इन्हें आगे बढ़ने से रोकने को सिंचाई विभाग को महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे।बांधों में पानी रहने से बदल सकते हैं हालातश्रीमती भदौरिया ने कहा है कि फतेहपुर सीकरी विकास खंड के तहत स्थित 13 वर्ग कि मी आकार का तेरहमोरी बांध के तहत महत्वपूर्ण जलसंरचना है और वर्ल्ड हैरीटेज सूची में दर्ज फतेहपुर सीकरी स्मारक का अभिन्न भाग,खारी नदी पर बना यह बांध खारी नदी के मानसूनकालीन प्रवाह का संचय और नियंत्रित निस्तारण के लिये सदियों से इस्तेमाल होता रहा है,किंतु अब इसके गेट और मूल संरचना क्षतिग्रसत हैं,जनकी मरम्मत करवा के फिर से संचालन उपयुक्त किया जा सकता है।

जब तक यह बांध सचालित रहा तब तक पूरे ब्लाक में हैंडपंप संचालित रहे,रोपे गये पेड़ों के पनपने की दर भी मौजूदा दर से कहीं अधिक थी।हरियाली के लिये भूजल में सुधार जरूरीजिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि भूगर्भ जल रिचार्ज की दृष्टि से जनपद की सबसे महत्वपूर्ण उटंगन नदी का स्त्रोत खनुआ बांध है, 22 वर्ग कि मी आकार का यह बांध ताज ट्रिपेजियम जोन के तहत आने वाली सबसे बडी जलसंचय और नदी जल प्रवाह नियंत्रण वाली संरचना है।

इसमें राजस्थान की गंभीर नदी की टेल का डिस्चार्ज आता है। किंतु राजस्थान के सिंचाई विभाग ने नदी का प्रवाह रोक बांध को खारिज करने की स्थिति बना रखी है।उन्होंने इस बांध में पानी का न्यूनतम जलस्तर सुनिश्चित करने के लिये ताज ट्रिपेजियम जोन के अध्यक्ष मंडलायुक्त आगरा को पत्र लिख कर निरीक्षण करवा के उपयुक्त कार्यवाही करने का अनुरोध किया है।

जिला पंचायत अध्यक्ष ने सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा के प्रतिनिधि मंडल से कहा कि ताज ट्रिपेजियम जोन प्राधिकरण Supreme Court of India in M. C. Mehta v. Union of India & Ors (1996)(1996) में गठित महत्वपूर्ण निकाय है,इसमें 10,400 km क्षेत्रफल (4,000 sq mi) का विषाल भाग आता है,जोन के तहत हरियाली अच्छादन के कार्य को प्राथमिकता है।उटंगन नदी के स्त्रोत खनुआ बांध और खारी नदी के का हैड तेहरा मोरी बांध ही जब जल शून्य हैं तो नदी में जल उपलब्धता की स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है परिणाम भूजल स्तर निरंतर गिरता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वह यह मामला ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी अध्यक्ष के संज्ञान में लायेंगी।सिविल सोसायटी आफ आगरा के सेकेट्री अनिल शर्मा ने कहा है कि ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी टी टी जैड क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करने के लिये उचित कदम उठाने चाहिये,भरपूर वर्षा के बावजूद आगरा के अधिकांश विकास खंडों में भूजल की स्थिति में सुधार नहीं हो सका है।

फलस्वरूप हरियाली आच्छादन के प्रयासों और खेती पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।उन्होने कहा है कि तेरहमारी बांध पुरातत्व सर्वेक्षण भारत की सूची में दर्ज महत्वपूर्ण जल संरचना है, पुरातत्व सर्वेक्षण इसके अनुरक्षण कार्य के लिये अनुमति देने को तैयार है।

न्यूज़ डेस्क

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *