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दशावतार लीला के भव्य मंचन से गूंज उठा नवीन गल्ला मंडी परिसरचतुर्थ दिवस पर भव्य मंचन से धर्म, सत्य और विजय का संदेश

जब-जब धरती पर बढ़ा अधर्म, तब-तब अवतरित हुए श्रीहरि

आगरा: शनिवार 14 फरवरी 2026

श्री श्यामा श्याम भागवत आयोजन समिति द्वारा आयोजित श्री कृष्ण लीला रासोत्सव के चतुर्थ दिवस शुक्रवार सायंकाल दशावतार लीला का अत्यंत भव्य, दिव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। नवीन गल्ला मंडी परिसर में सजी आकर्षक झांकियों, सुमधुर भजनों और प्रभावशाली अभिनय ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चेतना से सराबोर कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं श्रीहरि अपने विविध अवतारों में धर्म स्थापना हेतु अवतरित हो रहे हों।
लीला प्रसंग से पूर्व ठाकुर जी एवं स्वरूपों की विधिवत आरती अध्यक्ष हरी चंद्र गर्ग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश चंद्र गोयल, राजीव गुप्ता, देवेश शाह, मंच व्यवस्थापक अनीश अग्रवाल, शंभू नाथ, गोपाल गोयल, राज कुमार, उमंग अग्रवाल मनोज बघेल, राधा रानी गोयल, रेनू अग्रवाल, मीनू अग्रवाल, मीरा रानी अग्रवाल, विक्रांत गोयल, गगन गोयल एवं अमन गोयल ने उतारी।
नित्य रासलीला के बाद कलाकारों ने भगवान विष्णु के दस अवतारों—मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि—का अत्यंत सजीव मंचन किया। प्रत्येक अवतार के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है और धर्म संकट में पड़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न स्वरूपों में अवतरित होकर सज्जनों की रक्षा एवं दुष्टों का विनाश करते हैं।
मत्स्य अवतार में वेदों की रक्षा का प्रसंग, कूर्म अवतार में समुद्र मंथन, वराह अवतार में पृथ्वी उद्धार, नृसिंह अवतार में भक्त प्रह्लाद की रक्षा, वामन अवतार में राजा बलि से तीन पग भूमि का दान, परशुराम अवतार में अन्याय का दमन, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में रावण वध, श्रीकृष्ण अवतार में कंस संहार तथा बुद्ध अवतार में करुणा और अहिंसा का संदेश अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। अंत में कल्कि अवतार की झांकी ने यह संकेत दिया कि सत्य की अंतिम विजय निश्चित है।

दर्शकों ने प्रत्येक अवतार पर तालियों और जयघोष के साथ अपनी आस्था प्रकट की। पूरा पंडाल “हरि बोल” और “जय श्री हरि” के उद्घोष से गुंजायमान रहा। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और भावपूर्ण संवादों ने लीला को और अधिक जीवंत बना दिया।
स्वामी लक्ष्मण जी महाराज एवं स्वामी प्रदीप कृष्ण ठाकुर ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि दशावतार लीला हमें यह स्मरण कराती है कि ईश्वर सदा धर्म के पक्ष में खड़े रहते हैं और सत्य की विजय सुनिश्चित होती है। मानव जीवन में धर्म, करुणा और कर्तव्य पालन का विशेष महत्व है।
मंच व्यवस्थापक अनीश अग्रवाल ने जानकारी दी कि शनिवार सायंकाल श्री कृष्ण लीला रासोत्सव के अंतर्गत अत्यंत लोकप्रिय माखन चोरी लीला प्रसंग का मंचन किया जाएगा।
न्यूज़ डेस्क

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