घना कोहरा जो छाया है, छँटेगा एक दिन ए दोस्त
*साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था माधुर्य ने काव्य रसधार से किया नववर्ष का स्वागत*
आगरा: सोमवार 29 दिसंबर 2025
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था माधुर्य द्वारा दयालबाग स्थित कार्यालय पर काव्य रसधार से नववर्ष का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में शहर के नये-पुराने कवियों ने अपनी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का दिल जीत दिया।
माधुर्य की संस्थापक निशि राज ने जब अपना प्रेरक गीत “घना कोहरा जो छाया है छँटेगा एक दिन ए दोस्त.. कि इस कोहरे के पीछे हैं प्रकाशित सूर्य कितने ही…” सुनाया तो श्रोता तालियाँ बजाने पर मजबूर हो गए ।
गीतकार कुमार ललित के “प्रिय तुम्हारे दर्शनों को हम तरसते रह गए.. तुम कहाँ जाने कहाँ जाने बरसते रह गए” गीत पर श्रोता वाह वाह कर उठे। *डॉ. केशव शर्मा* ने सुनाया.. “छोटी सखियाँ खेलीं जो संग बचपन छूट गया.. लगे वह कोई सपना सा जो अब टूट गया…” *डॉ. राजेंद्र मिलन* ने कहा “लेकर आया नया संदेश जीवन का उत्कर्ष। उथल-पुथल के गलियारों से गुजर गया गतवर्ष.. ” *रमा वर्मा श्याम* ने लोकगीत सुनाया.. “काम ही करवाए ले दऊँ नौकरी छोड़…” *काँची सिंघल ओस* ने गजल से समाँ बाँध दिया “दूर जाने की बात करते हो, दिल जलाने की बात करते हो..” ब्रज भाषा के गीतकार *ब्रज बिहारी लाल बिरजू* ने सुनाया “द्वार की देहरी पर खड़ी तुम प्रिये। जाऊँ तो मुस्कुरा कर निहारा करो..” *यशोयश* ने सुनाया “श्याम सलोना साँवरो, नीकौ लागे बावरो” *श्रुति सिन्हा* ने नव वर्ष की मधुर शुभकामनाएं दीं । *महेश शर्मा गोपाली* ने श्याम का आह्वान किया। *सुधा वर्मा* ने प्रेरक कविता सुनाई तो *राम अवतार* जी ने लोकगीत से सब का मन जीत लिया। *डॉ. शशि गुप्ता* ने भी इसी क्रम में सुंदर लोकगीत सुनाया।
*आदर्श नंदन गुप्त, इंदल सिंह इंदु, रामेंद्र शर्मा, आचार्य उमाशंकर, दीपक श्रीवास्तव एवं नन्द नंदन गर्ग* जी की रचनाओं को सभी ने हृदय से सराहा। सभी का एकमत था कि इस तरह की काव्य गोष्ठियाँ राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देतीं हैं।
*माधुर्य संस्था रच रही नित नये आयाम*
आगरा की जानी-मानी कवयित्री, गायिका एवं शिक्षक तथा माधुर्य संस्था की संस्थापक-अध्यक्ष निशिराज और उनके पति, संस्था के कोषाध्यक्ष राजकुमार जैन द्वारा किए गए निस्वार्थ प्रयत्नों से 7 वर्ष पूर्व प्रारंभ की गई सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त यह संस्था बिना किसी आर्थिक सहयोग के निरंतर नित नए आयाम रच रही है।
हर वर्ष किसी न किसी नवोदित कवि अथवा लेखक की पुस्तक का लोकार्पण के साथ युवा कलाकारों को मंच प्रदान किया जा रहा है। यही सेवा भाव एवं उद्देश्य इस संस्था का है। अध्यक्ष निशि राज का कहना है कि संस्कृति की सेवा से राष्ट्र की सेवा ही मेरा उद्देश्य है।
न्यूज़ डेस्क










