टिकट निरस्त, किराए में कटौती – फिर भी ट्रेन में पूरा किराया और वसूला अतिरिक्त शुल्क
आगरा: गुरुवार 19 फरवरी 2026
गतिमान एक्सप्रेस में सीटें खाली रहीं, फिर भी वेटिंग, टिकट धारियों को पुष्टि नहीं मिली। चार्ट बनने के बाद टिकट स्वतः निरस्त कर दिए गए, किराए में कटौती कर ली गई, और जब यात्री ट्रेन में चढ़े तो उन्हें “बिना वैध टिकट” मानकर दुबारा पूरा किराया तथा अतिरिक्त शुल्क वसूला गया। इस गंभीर व्यवस्था संबंधी कमी को उजागर करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री के.सी. जैन ने आज रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव को ई-मेल के माध्यम से विस्तृत पत्र भेजकर तत्काल सुधार की मांग की है।
क्या हुआ 15 फरवरी को?
15 फरवरी 2026 को गाड़ी संख्या 12049 गतिमान एक्सप्रेस से आगरा कैंट से हजरत निजामुद्दीन तक यात्रा के लिए तीन यात्रियोंः दीपिका जैन (43 वर्ष), अंकिता सिंघल (38 वर्ष) और शशांक जैन (40 वर्ष) – ने टिकट बुक कराया था। चार्ट बनने के बाद टिकट की स्थिति क्रमशः वेटिंग लिस्ट 16, 17 व 18 रही। रेलवे के वर्तमान नियमों के अनुसार यदि ई-टिकट पूरी तरह वेटिंग में रह जाता है तो चार्ट बनने के बाद वह स्वतः निरस्त हो जाता है। इसी आधार पर इन यात्रियों का टिकट भी निरस्त मान लिया गया और किराए में से निर्धारित राशि की कटौती कर ली गई।
टिकट निरस्त, फिर भी सीटें खाली
यात्रियों के अनुसार जब वे ट्रेन में चढ़े तो एसी चेयर कार में अनेक सीटें खाली थीं। लेकिन चूंकि सिस्टम में उनका टिकट पहले ही निरस्त दिखाया जा चुका था, इसलिए उन्हें वैध टिकटधारी नहीं माना गया। परिणामस्वरूप, नया टिकट अधिक दर से जारी किया गया और अतिरिक्त शुल्क भी लिया गया।

यात्रियों को हुआ दोहरा आर्थिक नुकसान
पहले टिकट निरस्त होने पर किराए में कटौती- फिर ट्रेन में दुबारा पूरा किराया और अतिरिक्त शुल्क- यह स्थिति आम यात्री के लिए अत्यंत भ्रमित करने वाली और आर्थिक रूप से नुकसानदायक है।100 प्रतिशत बुकिंग के बावजूद सीटें खाली क्यों? जानकारों का मानना है कि आरक्षण चार्ट 100 प्रतिशत बुकिंग दर्शाता है, लेकिन वास्तविक यात्रा के समय सीटें खाली रह जाती हैं।
क्या हैं इसके प्रमुख कारण
अंतिम समय पर यात्रियों का न आना (नो-शो)- बीच के स्टेशन से चढ़ने वाले यात्रियों का अनुपस्थित रहना- विभिन्न कोटा (जैसे रक्षा, वीआईपी, या विशेष श्रेणी) की सीटों का उपयोग न होना- चार्ट बनने के बाद रद्दीकरणचूंकि चार्ट बनने के बाद सिस्टम गतिशील रूप से वेटिंग सूची को समायोजित नहीं करता, इसलिए सीटें खाली रह जाती हैं जबकि वेटिंग यात्री बाहर रह जाते हैं।

व्यवस्था की खामी या तकनीकी सुधार की आवश्यकता?
मुख्य प्रश्न यह है- जब सीटें वास्तविक रूप से उपलब्ध थीं, तो पहले से टिकट लेकर स्टेशन पहुंचे यात्रियों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई? क्या ऐसी व्यवस्था न्यायसंगत है जिसमें सीटें खाली चलें और भुगतान कर चुके यात्रियों को दंडित किया जाए?
सुधार से यात्रियों और रेलवे दोनों को लाभ
अधिवक्ता जैन ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि चार्ट बनने के बाद यदि सीटें खाली रह जाती हैं तो स्टेशन पर उपस्थित वेटिंग यात्रियों को वास्तविक समय में सीट आवंटित करने की व्यवस्था विकसित की जाए। आज के डिजिटल युग में टीटीई के हैंडहेल्ड उपकरण और केंद्रीय आरक्षण प्रणाली के माध्यम से यह संभव है। ऐसी व्यवस्था से कोई सीट खाली नहीं जाएगी, रेलवे की आय में वृद्धि होगी, वेटिंग यात्रियों को राहत मिलेगी, शिकायतों और विवादों में कमी आएगी और सीट उपयोग की दक्षता बढ़ेगी।
पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि इस सुधार को पहले वंदे भारत, गतिमान और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाए। सफल परिणाम मिलने पर इसे अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जा सकता है।

अधिवक्ता जैन का बयान“यह मुद्दा केवल तीन यात्रियों का नहीं है। यह लाखों वेटिंग यात्रियों की समस्या है। जब सीटें खाली हों तो वेटिंग यात्रियों को दंडित करना उचित नहीं है। तकनीकी सुधार से सीटों का शत-प्रतिशत उपयोग संभव है। इससे यात्रियों को राहत मिलेगी और रेलवे को भी अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। हमारा उद्देश्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, न्यायपूर्ण और जनहितकारी बनाना है।
विशेष संवाददाता








