दुकानदारों ने डीएम से मांगा संरक्षण
लाभचंद मार्केट के 25 से अधिक दुकानदारों ने जिलाधिकारी को सौंपा प्रार्थना पत्र
दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के आधार पर विध्वंस की आशंका, आजीविका संरक्षण की लगाई गुहार
आगरा: शुक्रवार 13 फरवरी 2026
राजा मंडी स्थित लाभचंद मार्केट के 25 से अधिक विधिसम्मत किरायेदारों एवं दुकानदारों ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी को प्रार्थना पत्र सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने बाजार के विरुद्ध कथित रूप से चलाए जा रहे दुर्भावनापूर्ण एवं मनगढ़ंत अभियान पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए किसी भी प्रकार की अवैध विध्वंसात्मक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने तथा संरक्षण प्रदान किए जाने की मांग की।
दुकानदारों ने बताया कि लाभचंद मार्केट जिन दो पट्टों पर निर्मित है, वे क्रमशः वर्ष 1940 एवं 1947 में शासन द्वारा विधिवत प्रदान किए गए थे। पिछले 75 वर्षों से अधिक समय में न तो किसी प्राधिकरण ने इन पट्टों को अवैध घोषित किया और न ही बाजार को कभी अतिक्रमण माना। निर्माण प्रशासन की जानकारी में खुले रूप से विद्यमान रहा तथा किसी प्रकार के उल्लंघन का आरोप भी कभी नहीं लगाया गया।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि बाजार का निर्माण स्वीकृत भवन मानचित्रों के अनुरूप किया गया था। फुटपाथ पर स्थित खंभे 1950 के दशक में स्वीकृत बरामदा संरचना के अभिन्न अंग के रूप में निर्मित हुए थे। दुकानों का आवंटन भी उसी दशक में किराया कलेक्टर द्वारा विधिसम्मत रूप से किया गया था। ऐसे में छह दशकों से अधिक समय बाद अचानक अवैधता का आरोप लगाना पूर्णतः निराधार प्रतीत होता है।किराया विवाद से उपजा विवाददुकानदारों के अनुसार हालिया विवाद की पृष्ठभूमि किराया वृद्धि के मुद्दे से जुड़ी है।
आरोप लगाया गया कि कुछ किरायेदार आज भी दशकों पुराने 50 से 100 रूपये प्रतिमाह के ऐतिहासिक किराये पर दुकानें संचालित कर रहे हैं, जबकि वे दुकानों के सामने बैठने वाले फेरीवालों से भारी राशि वसूलते हैं। एक मामले में तो दुकान को 1,25,000 रूपये प्रतिमाह पर उपकिराये पर दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है, जबकि मूल किराया मात्र 112.50 रूपये बताया गया है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि विधिसम्मत किराया देने वाले दुकानदारों को विवाद में अनावश्यक रूप से घसीटा जा रहा है।
गाटा संख्या को लेकर भ्रम की स्थितिप्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ शिकायतों में पट्टे की भूमि को गाटा संख्या 287 (सड़क भूमि) बताया जा रहा है। जबकि 10 फरवरी 2026 को हुए आधिकारिक सीमांकन में यह तथ्य सामने आया कि महात्मा गांधी रोड से कनहैया बिल्डिंग के पश्चिमी छोर तक राजा मंडी रोड का क्षेत्रफल ही 1270 वर्गमीटर से अधिक है, जो गाटा संख्या 287 के कुल क्षेत्रफल से अधिक बताया गया है। दुकानदारों का कहना है कि यह तथ्य ही इस दावे को असत्य सिद्ध करता है कि संपूर्ण पट्टे की भूमि सड़क भूमि में आती है।
कथित जालसाजी की जांच की मांगप्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि पिछले दो दशकों में विभिन्न संघों के माध्यम से साइक्लोस्टाइल हस्ताक्षर पत्रकों पर आधारित शिकायतें प्रस्तुत की गईं, जिनमें कथित रूप से मृत व्यक्तियों के हस्ताक्षर भी सम्मिलित पाए गए। उन्होंने इन हस्ताक्षरों की स्वतंत्र जांच कर जालसाजी के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
दुकानदारों ने जिलाधिकारी से निम्न मांगें कीं—
10 फरवरी 2026 के क्षेत्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएँ।झूठी एवं प्रेरित शिकायतों के आधार पर कोई विध्वंसात्मक या दमनात्मक कार्रवाई न की जाए।
पट्टा समाप्ति की परिस्थितियों एवं उसके विधिसम्मत पुनर्स्थापन की स्वतंत्र जांच कराई जाए।विधिसम्मत किरायेदारों एवं कर्मचारियों को तत्काल संरक्षण प्रदान किया जाए।
प्रतिनिधि मंडल में शामिल अभिषेक जैन, पुष्पेंद्र तोमर, अनूप गुप्ता, वीरेंद्र शर्मा, वासुदेव, सुधीर नाहर, सनी राजपूत, आरसी गुप्ता आदि दुकानदारों ने कहा कि लाभचंद मार्केट से जुड़े अधिकांश परिवार तीसरी पीढ़ी से यहां व्यवसाय कर रहे हैं और सैकड़ों लोगों की आजीविका इस बाजार पर निर्भर है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर न्यायोचित निर्णय लेने की अपेक्षा व्यक्त की है, ताकि वर्षों पुरानी इस वैध बाजार व्यवस्था को किसी भी प्रकार की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई से बचाया जा सके।
न्यूज़ डेस्क









