पटना: सोमवार 19 जनवरी 2026
RTI के पन्नों से निकला 440 वोल्ट का झटका! क्या “धंधा” बन चुका है कानून, क्या 148 बार सिस्टम की नाक के नीचे डकैती हुई है?
इससे पहले कि आप इसे केवल एक साधारण पोस्ट समझें, समाहरकालय पटना (कल्याण शाखा) से आया यह सरकारी कागज़ (RTI पत्रांक-6081) देख लीजिए। यह पन्ना चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि कैसे आपकी और हमारी मेहनत की कमाई (Tax) को कुछ जालसाजों ने ‘धंधा’ बना लिया है।
RTI से हुआ वह ‘440 वोल्ट’ का खुलासा, भारत के राजपत्र (14 अप्रैल, 2016) ने SC/ST (अत्याचार निवारण) संशोधन नियम के तहत पीड़ितों के लिए ₹1 लाख से लेकर ₹8.25 लाख तक का जो ‘सुरक्षा कवच’ तैयार किया था, कुछ शातिर लोगों ने उसे ‘उगाही का हथियार’ बना लिया है।
आंकड़े जो आपको सन्न कर देगा
1.148 फर्जी शिकार: पटना प्रशासन ने खुद लिखित में स्वीकार किया है कि 148 ऐसे मामले पाए गए जहाँ सरकारी पैसा (Relief Fund) तो डकार लिया गया, लेकिन जाँच में मामला पूरी तरह “झूठा और तथ्यहीन” प्रमाणित हुआ।
2. कानूनी लाचारी या मौन सहमति?: सबसे विस्फोटक जानकारी, प्रशासन ने माना है कि “झूठे मामलों में दी गई राशि की वसूली (Recovery) का भी कोई प्रावधान ही नहीं है।”
3.यहां खुली लूट का मतलब साफ़ है, झूठ बोलो, सरकारी खजाना लूटो और पकड़े जाने पर भी ‘मलाई’ तुम्हारी ही रहेगी!मेरा सीधा और संवैधानिक सवाल।
IPC/BNS में धोखाधड़ी और झूठी गवाही पर सख्त सजा है, तो इन 148 जालसाजों पर अब तक ‘FIR’ और ‘रिकवरी’ क्यों नहीं?
क्या यह उन सच्चे पीड़ितों का अपमान नहीं है जो आज भी वास्तविक अत्याचार झेलने के बाद एक-एक पैसे के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं?
क्या जनता का Tax इस तरह ‘लीगल लूट’ के लिए है?”न्याय का उपहास तब होता है जब कानून रक्षक नहीं, बल्कि भक्षकों का टूल बन जाए।”यह पोस्ट किसी समुदाय या कानून के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस ‘दीमक’ के खिलाफ है जो न्याय व्यवस्था को खोखला कर रही है। अगर आप भी मानते हैं कि ‘झूठ’ का व्यापार बंद होना चाहिए और वसूली का कानून बनना चाहिए।
अजीत कुमार सिंह (आर टी आई एक्टिविस्ट)






