अमिताभ बच्चन आत्मकेंद्रित व्यक्ति हैं ये तो मुझे शुरू से साफ़ था लेकिन 19 साल पहले उन्होंने सदाबहार अभिनेता देव आनंद (तब 84 साल) के साथ जो किया, वो जानकर अमिताभ के लिए बचा-खुचा सम्मान भी ख़त्म हो गया. इस बात का ज़िक्र आगे स्टोरी में करूंगा.…

महमूद-
करियर की ग्रोथ देखें तो अमिताभ ने हमेशा ‘यूज़ एंड थ्रो’ पॉलिसी का इस्तेमाल किया. 1973 में ‘ज़ंजीर’ में हिट होने से पहले अमिताभ ने स्ट्रगल के दिनों में कॉमेडियन महमूद का जमकर फायदा उठाया. अमिताभ की पहली फिल्म ‘7 हिन्दुस्तानी’ (1969) में महमूद के छोटे भाई अनवर अली ने भी एक रोल निभाया था. महमूद तब अमिताभ को अपने छोटे भाई अनवर की तरह ही मानते थे. उस वक्त महमूद की बॉलीवुड में तूती बोलती थी. मुंबई में अपने शुरुआती दिनों में अमिताभ ने महमूद के घर को ही अपना बसेरा बनाया.
अमिताभ वहीं खाना खाते थे. महमूद ने अपने छोटे भाई को इम्पाला कार गिफ्ट की थी. अमिताभ स्ट्रगल के दिनों में तब उसी कार में अनवर के साथ मुंबई में घूमा करते थे….अमिताभ की एक के बाद एक तकरीबन 12 फिल्में फ्लॉप हुईं. बाद में उन्हें फिल्में मिलनी लगभग बंद सी हो गईं. तब तक महमूद प्रोड्यूसर बन गए थे और उन्होंने अमिताभ बच्चन को फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ में बतौर हीरो मौका दिया. इसी फिल्म को देख अभिनेता प्राण ने प्रकाश मेहरा से अमिताभ के नाम की सिफ़ारिश की थी.
इसके बाद उन्हें ‘ज़ंजीर’ मिली और वह रातों रात स्टार बन गए…. 2004 में महमूद का निधन हुआ. निधन से कुछ अरसा पहले एक इंटरव्यू में महमूद ने कहा था,”अमित मेरी बहुत इज्जत करता है, लेकिन उसकी एक हरकत ने मुझे बड़ा दुख दिया. उसके पिता हरिवंश राय बच्चन बीमार थे तो मैं उनसे मिलने अमित के घर गया था. लेकिन जब मेरी बाइपास सर्जरी हुई तो अमित मुझे देखने तक नहीं आया. जबकि अपने पिता हरिवंश राय बच्चन के साथ ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल आया, जहां मैं भी उस समय भर्ती था. अमित मुझे देखने नहीं आया.अमित ने साबित कर दिया कि असली पिता ही असली होता है और नकली पिता नकली ही होता है”…

कादर ख़ान-
महमूद जैसी ही शिकायत दिवंगत अभिनेता कादर ख़ान को भी अमिताभ से रही. कादर खान ने अमिताभ बच्चन के साथ कई फिल्मों में काम किया जैसे- बेनाम (1974), अमर अकबर एंथनी (1977), मुकद्दर का सिकंदर (1978) और नसीब (1981). कादर ख़ान ने अमिताभ की कई हिट फिल्मों के डॉयलॉग भी लिखे…
‘समय टीवी’ के साथ इंटरव्यू के दौरान कादर खान ने अमिताभ बच्चन को लेकर कहा था, “वह चुनाव लड़े, सांसद बने और एमपी बनकर जब ये आए, तो उनका अंदाज बदल गया. मुझसे मेरे प्रोड्यूसर ने पूछा कि आप सर जी को मिले? मैंने पूछा कि कौन सरजी? उन्होंने कहा कि बच्चन साहब. मैंने कहा कि सर जी काहे का, मैं तो अमित बोलता हूं उनको. प्रोड्यूसर ने कहा-ऐसा बोलना नहीं, उन्हें पसंद नहीं है.”इसके बाद कादर खान ने मुस्कुराते हुए कहा, “यहां से गाड़ी दो ट्रैक पर चली गई.
वो सर जी थे और मैं कादर जी. तो जी ने नहीं माना कि मैं उनको सर जी कहूं. एक आदमी ने मुझे इसलिए अवॉइड किया कि मैंने उन्हें सर जी नहीं कहा. इसलिए नहीं कहा कि मैंने उन्हें हमेशा अमित बोला है. उनके कहने पर फिल्में छोड़-छोड़कर दूसरी फिल्में की हैं, तो बात नहीं बनी सर. बस खत्म हो गई कहानी.” इसके बाद कादर खान ने अमिताभ बच्चन के साथ कभी काम नहीं किया. साल 2012 में कादर खान का निधन हुआ…

अमर सिंह-
नब्बे के दशक के मध्य में जब अमिताभ की फिल्में फ्लॉप हो रही थीं, उनकी कंपनी एबीसीएल बैठ चुकी थी, मिस वर्ल्ड के आयोजन की वजह से अमिताभ कर्ज़ में डूब चुके थे. तब राजनेता अमर सिंह ने अमिताभ की बहुत मदद की थी.
सहारा प्रमुख सुब्रत राय से अमर सिंह ने ही अमिताभ की मुलाकात कराई थी. अमर सिंह अमिताभ के घर ‘प्रतीक्षा’ में अक्सर आते-जाते थे और उनके लिए एक कमरा आरक्षित रहता था. वर्ष 2010 के आसपास अमर सिंह और मुलायम सिंह यादव के बीच अदावत बढ़ी, और अमर सिंह चाहते थे कि जया बच्चन भी पार्टी छोड़ दें, लेकिन जया बच्चन सपा के साथ रहीं, जिससे अमर सिंह को नाराजगी हुई.
अमर सिंह ने यह भी कहा कि अमिताभ ने उनके एक बार पैसे मांगने पर मदद करने से इनकार कर दिया था, जिससे उन्हें दुख हुआ. 1 अगस्त 2020 को अमर सिंह के निधन से पहले, उन्होंने सिंगापुर के अस्पताल से एक वीडियो जारी कर अमिताभ और उनके परिवार के लिए अपने कठोर शब्दों के लिए खेद व्यक्त किया…बहरहाल जैसे अमर सिंह और सुब्रत राय ने मुश्किल वक़्त में साथ दिया वैसा अमिताभ ने उन दोनों के बुरे दिनों में नहीं किया…

धर्मेंद्र-
धर्मेंद्र ने अमिताभ को ‘शोले’ फिल्म दिलाई थी. लेकिन ‘राम बलराम’ फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों में खिंचाव आ गया. जुहू में दोनों के बंगले कुछ ही दूरी पर हैं लेकिन दोनों परिवार एक दूसरे के फंक्शन्स में जाने से कतराते रहे…शत्रुघ्न सिन्हा, परवीन बॉबी, टीनू आनंद और प्रकाश मेहरा को भी अमिताभ से कोई न कोई शिकायत रहीं…देव आनंद-अब आते हैं उस बात पर जिससे स्टोरी शुरू की. 2007 में अमिताभ ने देव आनंद के साथ क्या किया? देव आनंद के करीबी दोस्त मोहन चूरीवाला ने साल 2007 में हुई इस घटना को याद किया है. उन्होंने विकी लालवानी को दिए इंटरव्यू में बताया कि “अमर सिंह उस समय बच्चन परिवार के करीबी दोस्त थे. उन्होंने देव आनंद से वादा किया था कि वे अमिताभ बच्चन को देव आनंद की किताब ‘रोमांसिंग विद लाइफ’ के लॉन्च समारोह में लेकर आएंगे. अमर सिंह ने अमिताभ बच्चन, अनिल अंबानी और टीना अंबानी के साथ आने का वादा किया था…”अमर सिंह उस समय समाजवादी पार्टी से जुड़े थे और महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी.
मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख थे. इसी बीच राजनेता टी सुब्बारामी रेड्डी ने देव आनंद की टीम को फोन किया और बताया कि वे विलासराव देशमुख के साथ आ रहे हैं. इससे अमर सिंह को परेशानी हुई, क्योंकि उस समय कांग्रेस के साथ उनके संबंध अच्छे नहीं थे…अमर सिंह ने अमिताभ के साथ बुक लॉन्च इवेंट के बाद देव आनंद के डिनर पर रहने का वादा तो किया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इवेंट खत्म होने से पहले ही वे चले गए. अमिताभ कुछ मिनट ही बुक लॉन्च पर रहे. वो बुक की कॉपी लिए बिना ही वहां से चले गए…देव आनंद को लगा कि अमिताभ को इवेंट में शायद किसी बात का बुरा लगा. तब देव आनंद के कहने पर मोहन चूरीवाला ने अमर सिंह को फोन किया. अमर सिंह से फोन पर बात करने के बाद मोहन ने कहा कि वो अंबानी, बच्चन और अमर सिंह के लिए किताबें ‘जलसा’ (अमिताभ का घर) में पहुंचा देंगे.

देव आनंद को ये सब खटक रहा था. उन्होंने मोहन चूरीवाला से कहा वो भी उनके साथ अमिताभ के घर चलेंगे…मोहन चूरीवाला ने बताया वो देव आनंद के साथ जलसा पहुंचे और हॉर्न बजाया. सिक्योरिटी इंचार्ज बाहर आया. देव आनंद को वो पहचान नहीं पाया. उसने आने की वजह पूछी और अंदर चला गया. 15 मिनट तक कोई बाहर नहीं आया. ऐसे में मोहन ने अमर सिंह को फोन किया, जिन्हें बाहर आने में 10 मिनट और लग गए. तब तक देव साहब और बेचैन हो गए. बोले- “काफी देर हो गई है. इतनी देर क्यों लग रही है?…”अमर सिंह नाइटवियर में थे. बाहर आए तो देव आनंद को मोहन चूरीवाला के साथ कार में देखकर हैरान रह गए. क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि देव आनंद भी मोहन के साथ आएंगे…अमर सिंह ने फिर मोहन से कहा- “अनुमति लेनी पड़ती है.” अमिताभ बच्चन को फिर भी वहां आने में 15 मिनट लगे क्योंकि शायद वो हेल्थ क्लब में थे.
मोहन चूरीवाला के मुताबिक वहां कुछ मिनट सब साथ बैठे और चाय पी…साल 2011 में देव आनंद के निधन के बाद अमर सिंह ने ‘वीर संघवी’ के साथ बातचीत में खुलासा किया था कि देव आनंद को इंतजार करना पड़ा था, क्योंकि ‘जलसा’ में किसी भी मेहमान को लाने के लिए बच्चन परिवार से अनुमति लेनी पड़ती है…मोहन के मुताबिक देव आनंद को इस अनुमति की बात का पता नहीं चला. इसका खुलासा उनके निधन के बाद अमर सिंह ने किया. अगर जीवित रहते देव साहब को इसका पता चलता तो बहुत बुरा लगता…
खुशदीप सहगल








