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ईरान में इमाम की सत्ता नहीं रह सकती, और किसी देश या यहूदियों के जीने के अधिकार को नहीं छीन सकती

आगरा शुक्रवार 6 मार्च 2026

आम आदमी की सोच आम सोच तक ही सीमित रहती है। हमारी सोच या हर बात दुरुस्त नहीं होती, हम एक तरफा सोच लेकर चलते हैं, हम ट्रम्प विरोधी हैं, और उसकी कार्यशैली से विरोधी होना स्वाभाविक है, लेकिन ट्रम्प अमेरिका नहीं है, और अमेरिका ट्रम्प नहीं है।

देखते जाइए अभी अमेरिका को जो समाप्त मानते है, अभी अमेरिका की शक्तियों या इस युग में उसकी सत्ता का, या विश्व के देने का या स्पेस तक पहुँचने का मार्ग आदि। अभी 1% प्रतिशत भी नहीं देखा है, सत्ताएं धर्म का पालन करती है, लेकिन सत्ताएं राजनैतिक होती है, धार्मिक नहीं भारत में शंकराचार्य सत्ता चलाने लगे, और ईसाई देशों में पोप.. इसी तरह ईरान में इमाम की सत्ता नहीं रह सकती, और किसी देश या यहूदियों के जीने के अधिकार को नहीं छीन सकती .. सनातन कभी नहीं कहता इस्लाम जो अभी हाल ही में आया है या सनातन विरोधी है, उसे जीने का कोई अधिकार नहीं है।

ये धर्म युद्ध है, बहाना कोई बने, तेल हो या चीन यह सब बहाने माध्यम बनते रहते है।सत्ता चलाने या राजा बनने, और रावण से युद्ध करने के लिए, राम को भी तुच्छ मानव के रूप में जन्म लेना पड़ा था। वानरों और वन मानुषों की सहायता भी लेनी पड़ी, सत्ता के लिए जनता की भावनाओं का भी ध्यान रखना पड़ा, यहाँ तक कि जनता के प्रश्न पर पत्नी सीता को भी त्यागना पड़ा।

इस युद्ध में भी पैटर्न सिंदूर वाला है, ईरान से युद्ध नहीं बल्कि ऑपरेशन है। सिंदूर का उद्देश्य आतंकवादियों को समाप्त करना था, इसमें ईरान की इस्लामिक सत्ता जो यहूदियों के आस्तित्व को, या यहूदी सत्ता को चुनौती देती है, और कभी हिजबुल्लाह, कभी हूतियों, कभी हमास, कभी लेबनान और कभी यमन के माध्यम से निशाना बनाती है।

इस ऑपरेशन में IRGC के ठिकानों को ही निशाना बनाया है, खोमेनी ही निशाना है ईरान नहीं। अमेरिका को जब से चीन ने रेयर अर्थ मटेरियल पर आंख दिखाना शुरू किया है, निशाना चीन की तेल सप्लाई जो वेनेंजुएला से हो, ईरान से या फिर रूस से बंद कराना भी है।

तेल सिर्फ डॉलर से ही यूएनओ, आईएमएफ , वर्ल्ड बैंक , डब्लू एच ओ हो, यूनेस्को या फिर नाटो चलाते हैं, जिससे पूरे विश्व की R&D चलती है। अमेरिका नहीं पूरा विश्व डॉलर की धुरी पर है, अमेरिका कमजोर होता है तो भी डॉलर बड़ जाता है। अमेरिका स्ट्रॉंग होता है तो भी डॉलर बड़ जाता है, खरबूजा छुरी पर गिरे या छुरी खरबूजे पर कटना खरबूजे को ही है।

पूरन डावर

चेयरमैन, फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद

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