श्रद्धा और आस्था का सैलाब: पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
आगरा गुरुवार 12 मार्च 2026
श्री बुंदेले बाबा कुंवर हरदौल जी महाराज का 364 वां वार्षिक उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर चामुंडा देवी मंदिर, अलबतिया रोड से धाकरान चौराहा स्थित बुंदेले मंदिर तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में सैकड़ो श्रद्धालु शामिल हुए, वहीं मार्ग में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ खेमचंद धाकड़, ख्यालीराम धाकड़, मनोहर सिंह धाकड़ और श्री धाकड महासभा प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश धाकड़ द्वारा मां चामुंडा देवी और बाबा बुंदेले की प्रतिमा की विधिवत आरती के साथ किया गया। भक्ति और जयकारों के बीच निकली शोभायात्रा में सबसे आगे भगवान श्री गणेश, शिव-पार्वती एवं शिव परिवार, राधा-कृष्ण, आदि योगी महादेव, बजरंगबली तथा श्रीराम परिवार की आकर्षक झांकियां और बाल स्वरूपों की सजीव झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। शोभायात्रा के अंतिम डोले में बाबा कुंवर हरदौल जी महाराज का पावन डोला निकाला गया, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
यह शोभायात्रा चामुंडा देवी मंदिर से प्रारंभ होकर मारुति एस्टेट, शाहगंज, एमजी रोड होते हुए धाकरान चौराहा स्थित बुंदेले मंदिर पर पहुंचकर संपन्न हुई। मार्ग में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने जलपान की व्यवस्था की और श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया।
संस्था के अध्यक्ष आलोक धाकड़ और महामंत्री धर्मेंद्र धाकड़ ने बताया कि बाबा कुंवर हरदौल जी महाराज त्याग, बलिदान और भाई-बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं। उनके प्रति बुंदेलखंड सहित देश के कई क्षेत्रों में अटूट आस्था है और श्रद्धालु उन्हें लोकदेवता के रूप में पूजते हैं। शोभायात्रा के मंदिर पहुंचने पर भक्तों ने “बाबा कुंवर हरदौल जी महाराज की जय” के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
इस अवसर पर संरक्षक इंद्रजीत धाकड़, राममूर्ति धाकड़, कोषाध्यक्ष प्रवीण धाकड़, मंत्री गब्बर धाकड़, दिनेश धाकड़, राजीव धाकड़, बॉबी धाकड़, बबलू धाकड़ राजेंद्र धाकड़ सत्यवान धाकड़, परसोती धाकड़ आदि उपस्थित रहे।
बुंदेलखंड के लोक देवता हैं बाबा बुंदेले बाबा कुंवर हरदौल जी महाराज बुंदेलखंड की आस्था और लोकविश्वास के प्रमुख लोकदेवता माने जाते हैं। वे ओरछा के महाराजा वीर सिंह देव के पुत्र और राजा जुझार सिंह के छोटे भाई थे। लोककथाओं के अनुसार उन्होंने अपने चरित्र और मर्यादा की रक्षा के लिए विषपान कर बलिदान दे दिया। उनके त्याग और सत्यनिष्ठा के कारण उन्हें लोकदेवता के रूप में पूजा जाने लगा।बुंदेलखंड में आज भी विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर सबसे पहले बाबा हरदौल को निमंत्रण देने की परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना पर बाबा हरदौल अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखते हैं।
न्यूज़ डेस्क








