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कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह दतिया के सियासी गलियारों में एक बड़ा और जाना-पहचाना नाम

दतिया विधानसभा उप चुनाव में कांग्रेस से घनश्याम सिंह और बीजेपी से आशुतोष तिवारी के बीच मुकाबला होगा

दतिया: सोमवार 13 जुलाई 2026

मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी टिकट वितरण के बाद मचे अंदरूनी घमासान को शांत करने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने अपना बड़ा दांव खेलते हुए पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया है।

घनश्याम सिंह के मैदान में आने से दतिया उपचुनाव का मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का हो गया है। राजघराने से ताल्लुक और बेदाग छवि पर कांग्रेस का भरोसाकांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह दतिया के सियासी गलियारों में एक बड़ा और जाना-पहचाना नाम हैं। वह दो बार के विधायक रह चुके हैं और उनका ताल्लुक तत्कालीन रियासत दतिया राजघराने से है। क्षेत्र में उनकी पहचान एक शांत, शालीन और लगातार सक्रिय रहने वाले जमीनी नेता के रूप में होती है।

कांग्रेस आलाकमान ने स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ और जनता के बीच उनकी साफ-सुथरी छवि को देखते हुए ही उन पर दोबारा भरोसा जताया है।

बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी का फायदा उठाने की तैयारी

दतिया सीट से भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है, जिसके बाद से ही नरोत्तम समर्थकों में भारी आक्रोश है और सामूहिक इस्तीफों का दौर चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के भीतर मचे इस बवाल और कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सीधा फायदा उठाने के लिए ही कांग्रेस ने घनश्याम सिंह जैसे अनुभवी और शांत चेहरे को आगे किया है, ताकि वे असंतुष्ट वोटों को अपने पाले में ला सकें।

दतिया में अब सीधा और कड़ा मुकाबला

कांग्रेस द्वारा घनश्याम सिंह के नाम के ऐलान के बाद अब दतिया का चुनावी रण पूरी तरह सज चुका है। एक तरफ भाजपा के नए चेहरे आशुतोष तिवारी हैं, जिनके पीछे संगठन और नरोत्तम मिश्रा का रसूख दिखाने की कोशिश की जा रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज और राजघराने से ताल्लुक रखने वाले घनश्याम सिंह हैं। अब देखना होगा कि दतिया की जनता विकास और संगठन के नाम पर बीजेपी को चुनती है या घनश्याम सिंह की शालीनता पर मुहर लगाती है।

विशेष संवाददाता

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