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नागरी प्रचरिणी सभा में ‘हिंदी साहित्य सभा’ के बैनर तले अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न

आगरा: शनिवार 18 जुलाई 2026

नागरी प्रचरिणी सभा में हिंदी साहित्य सभा के बैनर तले अखिल भारतीय कवि सम्मेलन संपन्न हुआ। इस अवसर पर आगरा के वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र गोस्वामी तथा कवि एवं समाजसेवी पर्यावरणविद मुन्ना लाल मिश्रा का मुख्य अतिथि द्वारा शॉल, माला, पटका तथा अभिनन्दन पत्र देकर सम्मानित किया गया । समारोह की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय गीतकार रामेन्द्र मोहन त्रिपाठी ने की।

इससे पूर्व माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवलन मुख्य अतिथि महेन्द्र कुमार गोयल एवं विशिष्ट अतिथि ओम ठाकुर, डॉ महेश धाकड़ तथा कवियों के हाथों सम्पन्न हुआ। सरस्वती वंदना का पाठ कवयित्री रजिया बेगम जिया द्वारा किया गया।

शिकोहाबाद के व्यंग्यकार अरविन्द तिवारी के व्यंग्य समाज की विद्रूपताओं पर आधारित रहे वही आगरा के वरिष्ठ साहित्यकार शीलेन्द्र वशिष्ठ के गीत खूब सुने गये….

शांत… निश्चल… क्षितिज पट निस्तब्ध है,

बहता मधुर मलयज,

दिशाएं मौन सूरज ढल रहा है,

संक्रमण का द्वंद्व भीतर पल रहा है!

इन्दौर के हास्यव्यंग कवि सत्येन वर्मा ने कहा…

शहर की गलियाँ शहर की राहें चौराहे सब जाने हैं,

हम आवारा अपने शहर के सारा शहर हमें जाने है,

धोखा देना घोखा खान सीख गये हैं शहर के लोग,

शहर में रहकर हमने जाना दूर के ढोल सुहाने हैं।

अनेक विषयों पर करारे व्यंग्य किए धौलपुर से पधारी कवयित्री रजिया बेगम जिया के श्रृंगार के गीत दिलो दिमाग पर छा गये, उन्होंने कहा…..

“सुंदर सा इक चित्र हृदय के द्वार टंगा रहता है,

रंग भरो खाली खाली है बात यही कहता है।

फिरोजाबाद के राष्ट्रीय हास्य व्यंग्य कवि की ड़ेढ़ लाझों वाली व्यंग्य क्षणिकाए खूब सराही गयी।

बाह के कवि शिवराम यादव शांति ने एक सवैया प्रस्तुते किया…..

पूत कपूत हुए कुछ हैं, सहयोग नहीं करते घर में।

पास पड़ोस करें झगड़ा, हथियार लिए फिरते कर में।।

लोग भली कुछ बात कहें, वह भूल रहे पल ही भर में,

कौन यहां अब न्याय करे, खुद मात पिता रहते डर में।।

वहीं रजनीकान्त लवानिया ने स्वरचित अनुषमाष्टक पढ़ा तो वातावरण आध्यात्मिक हो उठा……

जिस मनुष्य काल को हम बैठे हैं वे सपने तो टूट गये, सतयुग त्रेता द्वापर मिलकर सब कलयुग में डूब गये।

प्रसिद्ध गीतकार डॉ राजकुमार रंजन ने इन पंक्तियों पर वाहवाही लूटी –

जिअ तन माटी को कन भैया फिर काहे इतरावै,

पाच तत्व का बनै पींजरा जस कौ तस ह्वै जावै,

धावै इत उत करत गुमान धन को।

अरविंद समीर ने कहा….

मैं ज़मी पर हूँ मगर तुम तो फलक बनती हो ,

दोस्ती में भी अदावत की झलक बनती हो।।

हिन्दी भाषा की श्रेष्ठता सिद्ध करते हुए मुन्ना लाल मिश्र ‘धुंआधार’ ने काव्यपाठ करते हुए कहा-

हिन्दी भाषा सम्मान बढ़े गौरव बढ़ जाय हमारा,

हिन्द देश की हिन्दी भाषा है उद्घोष हमारा,

हिन्दी सीखो हिंदी बोलो हो पावन कंठ हमारा,

हिन्दी भाषा सम्मान कराना है कर्तव्य हमारा।।

रजनी कान्त लवानिया, यादराम, कवि किंकर, शिवशंकर सहज, शाहिद महक (बाह), आचार्य उमाशंकर, अतुल दुबे, राजेन्द्र दवे आदि कवियों का शानदार काव्य पाठ रहा।

इस अवसर पर महेन्द्र कुमार गोयल, वरिष्ठ पत्रकार ओम ठाकुर ,आदर्श नन्दन गुप्त, डॉ महेश धाकड़ मौजूद रहे।

साहित्य सभा के अध्यक्ष अरुण रावत, महासचिव डॉ राजकुमार रंजन, उपाध्यक्ष राजेश दीक्षित, सचिव अरविंद समीर, मीडिया प्रभारी कृष्ण कुमार सिंह, राहुल राज, ठाकुर बलवीर सिंह, अमित दीक्षित तथा श्री रामदास सनातन गोमती ट्रस्ट के हर्ष मिश्रा ने सभी कवियों तथा अतिथियों का शॉल, माला एवं अभिनंदन पत्र देकर स्वागत किया। सम्मेलन में सुधि श्रोताओं सहित शहर के प्रमुख कवियों ने भाग लिया।

विशेष संवाददाता

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