आगरा: शनिवार 22 अगस्त 2026
ताजनगरी आगरा में बीमारियों के प्रकोप के बीच बाजार में मिलावटी और दूषित खाद्य पदार्थों का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। प्रतिबंध के बावजूद शहर में एनालॉग (नकली) पनीर की सप्लाई जारी है।
मामले के मुख्य बिंदु:

राजस्थान-एमपी से आ रहा एनालॉग पनीर:
आगरा में रोक के बावजूद राजस्थान और मध्य प्रदेश से एनालॉग पनीर की सबसे ज्यादा सप्लाई की जा रही है। 210 से 230 रुपये प्रति किलो मिलने वाले इस पनीर का उपयोग ढाबों, ठेले वालों और छोटे रेस्टोरेंट में हो रहा है। रोक के बावजूद शहर में एनालॉग पनीर की सप्लाई जारी है।
FSDA ने की बड़ी कार्रवाई:
आने वाले त्योहारों के मद्देनज़र स्थानीय प्रशासन ने खाद्य उत्पादों पर तीखी नज़र रखी हुई है। सदर की चाट गली में छापेमारी के दौरान भारी गंदगी पाई गई है। चाट गली में सड़े-गले खाद्य पदार्थ मिले, जिसके खिलाफ (FSDA) खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने सख्त कार्यवाही की है।

70% सैंपल फेल, 100 कुंतल पनीर नष्ट:
एफएसडीए (FSDA) द्वारा लिए गए पनीर के नमूनों में से 70 फीसदी फेल पाए गए हैं, जिनमें दूध की जगह पाम ऑयल, वनस्पति, स्टार्च और सोया प्रोटीन मिला है। विभाग अब तक 100 कुंतल नकली पनीर नष्ट करा चुका है।
चाट गली में छापेमारी, गंदगी व दूषित खाना मिला:
स्टेशन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन और छावनी परिषद की टीम (ले. कर्नल इंद्रयुद्ध बनर्जी के नेतृत्व में) ने सदर की चाट गली का निरीक्षण किया। इस दौरान फ्रिज में रखे सड़े-गले खाद्य पदार्थ, डस्टबिन के ऊपर रखा खाना और भीषण गंदगी मिली, जिस पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य के लिए खतरा, बेचने पर होगी FIR:
डॉक्टरों के अनुसार पाम ऑयल और इंडस्ट्रियल ट्रांस फैट युक्त इस पनीर से हृदय रोग और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का गंभीर खतरा रहता है। सहायक आयुक्त (खाद्य-2) महेंद्र श्रीवास्तव के अनुसार एनालॉग पनीर बेचने वालों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराई जायेगी।
एनालॉग पनीर (Analogue Paneer) एक कृत्रिम या नॉन-डेयरी उत्पाद है। इसे असली दूध की बजाय पाम ऑयल, वनस्पति तेल, स्टार्च और सोया प्रोटीन जैसी चीजों से बनाया जाता है। यह दिखने और स्वाद में असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन बहुत सस्ता होता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने स्वास्थ्य जोखिमों के कारण इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

एनालॉग पनीर क्या है और कैसे बनता है?
सामग्री: पाम ऑयल, डालडा, सोया प्रोटीन, स्टार्च और केमिकल।फायदा: इसकी शेल्फ लाइफ लंबी होती है और लागत कम आती है।
उपयोग:
इसका उपयोग अक्सर होटल और रेस्टोरेंट में किया जाता है।

असली और एनालॉग पनीर में क्या है अंतर: कैसे पहचानें
असली पनीर की पहचान करने के लिए उसे हाथ से मसलकर देखें। असली पनीर हाथों से मसलने पर आसानी से छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है, जबकि नकली या सिंथेटिक पनीर रबड़ जैसा खींचता है या ज्यादा चिकना होने के कारण आसानी से नहीं टूटता और उससे साबुन जैसी गंध आती है।
स्वाद और स्पर्श परीक्षण रंग और खुशबू:
असली पनीर का रंग सफेद या हल्का क्रीमी होता है और उसमें दूध जैसी सौंधी महक आती है।
लचीलापन:
ताजा और शुद्ध पनीर नरम और हल्का स्पंजी होता है, लेकिन दबाने पर वह रबड़ की तरह खिंचता नहीं है।
स्वाद:
कच्चा असली पनीर खाने में हल्का मीठा और मलाईदार लगता है।

आयोडीन टिंचर टेस्ट (स्टार्च की जांच):
पनीर के एक छोटे टुकड़े को पानी में उबालें। ठंडा होने के बाद उस पर आयोडीन टिंचर की कुछ बूंदें डालें। यदि पनीर का रंग बदलकर नीला हो जाता है, तो उसमें स्टार्च या मिलावट है। असली पनीर का रंग नहीं बदलता।
बनावट:
असली पनीर हाथ से दबाने पर टूट जाता है, जबकि एनालॉग पनीर रबर की तरह खिंचाव वाला होता है।
घुलना:
असली पनीर मुंह में आसानी से घुल जाता है, जबकि एनालॉग पनीर को चबाना पड़ता है, यह च्युई (चबाने में सख्त) होता है।
कानूनी स्थिति:
FSSAI के नियमों के तहत इसे बेचना अपने आप में अपराध नहीं है, बशर्ते इसे ‘एनालॉग’ या ‘नॉन-डेयरी’ कहकर बेचा जाए, लेकिन इसको खाद्य समग्री के रूप मे धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। स्वास्थ्य सुरक्षा के मद्देनजर कई राज्यों ने इसके उत्पादन पर रोक लगाई है। उ प्र सरकार ने इसे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया हुआ है।
सर्वे रिपोर्ट न्यूज़ टीम









