आगरा: गुरुवार 4 जून 2026
विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर पालीवाल पार्क के प्रातः भ्रमणकर्ताओं ने प्रकृति द्वारा निःशुल्क प्रदान किए जाने वाले बीजों और स्वाभाविक रूप से उगने वाले पौधों (Natural Regeneration) को संरक्षित करने तथा उनसे अधिकाधिक हरियाली विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर भ्रमणकर्ताओं ने पार्क में स्थित दुर्लभ वृक्ष अंकोल (Ankol) – Alangium salviifolium के बीज एकत्रित किए। उपस्थित सदस्यों ने संकल्प लिया कि इन बीजों को अंकुरित कर पौधे तैयार किए जाएंगे, उनका संरक्षण किया जाएगा तथा बड़े होने तक उनकी देखभाल की जाएगी।
चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि अनेक बार वृक्षों के नीचे स्वाभाविक रूप से छोटे-छोटे पौधे उग आते हैं, जिन्हें प्रायः खरपतवार समझकर नष्ट कर दिया जाता है। जबकि यही पौधे भविष्य के बड़े वृक्ष बन सकते हैं। ऐसे पौधों को सुरक्षित स्थानों पर प्रतिरोपित कर उनका संरक्षण किया जाना चाहिए। विशेष रूप से पीपल, गूलर, पाखड़ और बरगद जैसे देशी वृक्षों के स्वाभाविक रूप से उगे पौधों को बचाने और विकसित करने पर जोर दिया गया।

प्रातः भ्रमणकर्ताओं ने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने आसपास उपलब्ध बीजों और स्वाभाविक रूप से उगे पौधों को संरक्षित करने का छोटा-सा प्रयास करे, तो बिना किसी बड़े खर्च के लाखों नए वृक्ष तैयार किए जा सकते हैं। हरियाली बढ़ाने के लिए बीज और पौधे प्रकृति की ओर से मिलने वाला सबसे मूल्यवान और निःशुल्क संसाधन हैं।
इस अवसर पर किशोर जैन, अनिल अग्रवाल, के. सी. जैन तथा अन्य प्रातः भ्रमणकर्ताओं ने बीज संग्रह, पौध संवर्धन और वृक्ष संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया तथा अधिकाधिक लोगों से इसमें जुड़ने का आह्वान किया।“एक बीज – एक वृक्ष – एक हरित भविष्य” का संदेश देते हुए उपस्थित सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशेष संवाददाता











