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विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून 2026) पर विशेष: ताज महल को बचाने के लिए करोड़ों नए पेड़ों की आवश्यकता, प्रतिबंध नहीं प्रोत्साहन चाहिए

ताज क्षेत्र का वनावरण मात्र 3.38 प्रतिशत, फिर भी किसानों को पेड़ लगाने से हतोत्साहित कर रही है

वर्तमान व्यवस्था TTZ में राष्ट्रीय लक्ष्य 33% के मुकाबले वनावरण मात्र 3.38%,

कृषि वानिकी को मिले विशेष संरक्षण

किसानों को अदालत नहीं, पौधे चाहिए :

ताज क्षेत्र में वृक्षारोपण बढ़ाने की नई सोच की जरूरत

एक पेड़ काटने पर दस पेड़ लगाने की शर्त छोटे किसानों के लिए असंभव

आगरा : गुरुवार 4 जून 2026

क्या आप विश्वास करेंगे कि दुनिया के सात आश्चर्यों में शामिल ताजमहल जिस क्षेत्र में स्थित है, उस पूरे ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र (TTZ) का कुल वनावरण मात्र 3.38 प्रतिशत है?

यह आंकड़ा तब और अधिक चिंताजनक हो जाता है जब राष्ट्रीय वन नीति देश के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र को हरित आवरण के अंतर्गत लाने का लक्ष्य निर्धारित करती है तथा भारत का कुल वनावरण लगभग 21.76 प्रतिशत है। इसके विपरीत ताजमहल की सुरक्षा के लिए बनाए गए पूरे ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र का वनावरण केवल 3.38 प्रतिशत है।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पर्यावरण कार्यकर्ता के. सी. जैन ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कहा कि यदि इस स्थिति को बदलना है तो किसानों को वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित करना होगा, न कि ऐसी व्यवस्थाएँ बनानी होंगी जिनसे वे वृक्ष लगाने से ही डरने लगें।

ताज क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर

भारत सरकार की इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR-2023) के अनुसार ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र के जिलों की स्थिति निम्न प्रकार है :

जिला वनावरण (वर्ग किमी) प्रतिशत

आगरा 274.73 6.82%

एटा 20.82 0.84%

फिरोजाबाद 60.97 2.58%

हाथरस 22.09 1.20%

मथुरा 53.34 1.60%

भरतपुर 214.28 4.23%

कुल TTZ 646.23 3.38%

इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि ताज क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है। एटा, हाथरस और मथुरा जैसे जिलों में वनावरण 2 प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि यदि इस क्षेत्र में वृक्षारोपण नहीं बढ़ेगा तो हरित आवरण कैसे बढ़ेगा?

सरकारी भूमि नहीं, किसानों की भूमि बनेगी समाधान

के. सी. जैन ने कहा कि TTZ क्षेत्र में सरकारी वन भूमि सीमित है जबकि लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि उपलब्ध है।यदि किसान अपनी मेड़ों, खेतों की सीमाओं, तालाबों के किनारों और अनुपयोगी भूमि पर वृक्ष लगाने लगें तो अगले 10 से 15 वर्षों में करोड़ों नए वृक्ष खड़े किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ताज क्षेत्र को बचाने का सबसे बड़ा पर्यावरणीय कार्यक्रम किसी सरकारी विभाग के कार्यालय में नहीं, बल्कि किसानों के खेतों में शुरू होगा।

किसान पेड़ क्यों लगाएगा यदि उसे भविष्य का भरोसा न हो?

कृषि वानिकी का मूल सिद्धांत यह है कि किसान वृक्ष को एक फसल की तरह लगाए, उसकी देखभाल करे और परिपक्व होने पर उसका उपयोग भी कर सके। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में अनेक किसानों के मन में यह धारणा बन रही है कि भविष्य में अपने ही खेत में लगाए गए वृक्षों को काटने के लिए उन्हें जटिल अनुमति प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि किसान को यह लगेगा कि आज लगाया गया पेड़ कल उसके लिए कानूनी जटिलताओं का कारण बन सकता है, तो वह वृक्षारोपण से दूर हो जाएगा।

राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति क्या कहती है?

भारत सरकार की राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति, 2014 स्पष्ट रूप से कृषि वानिकी को वृक्ष आवरण बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम मानती है।

नीति आयोग, आर्थिक सलाहकार परिषद तथा विभिन्न विशेषज्ञ समितियों ने भी माना है कि कटान एवं परिवहन पर अत्यधिक नियंत्रण कृषि वानिकी को हतोत्साहित करता है।यदि देश को 33 प्रतिशत हरित आवरण तक पहुँचना है तो किसानों को वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित करना होगा।

दस गुना प्रतिपूरक वृक्षारोपण – व्यवहारिक नहीं

के. सी. जैन ने कहा कि एक वृक्ष के बदले दस वृक्ष लगाने की अवधारणा पहली दृष्टि में आकर्षक लगती है, लेकिन किसानों की वास्तविक परिस्थितियों में यह व्यावहारिक नहीं है। यदि किसी किसान ने अपने खेत में 100 वृक्ष लगाए और वर्षों बाद उन्हें काटना चाहे तो उसे 1000 नए वृक्ष लगाने होंगे। अधिकांश किसानों के पास इतनी अतिरिक्त भूमि उपलब्ध नहीं होती।

छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह लगभग असंभव शर्त है।उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था अंततः वृक्षारोपण को बढ़ाने के बजाय कम कर सकती है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री से अपील

के. सी. जैन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए अपने पत्र में अनुरोध किया है कि राज्य सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उपयुक्त आवेदन प्रस्तुत कर कृषि वानिकी के अंतर्गत निजी भूमि पर लगाए गए वृक्षों के संबंध में वर्तमान व्यवस्था पर पुनर्विचार का अनुरोध करे तथा कृषि वानिकी को विशेष प्रोत्साहन देने की नीति अपनाए। ताज को बचाने का रास्ता किसानों के खेतों से होकर जाता हैउन्होंने कहा कि ताजमहल की रक्षा केवल प्रतिबंधों से नहीं होगी।

ताजमहल की रक्षा तब होगी जब ताज क्षेत्र का प्रत्येक किसान वृक्षारोपण को अपने हित, पर्यावरण के हित और आने वाली पीढ़ियों के हित से जोड़कर देखेगा।

आज ताज क्षेत्र को सबसे अधिक आवश्यकता किसी नए प्रतिबंध की नहीं, बल्कि करोड़ों नए वृक्षों की है।“ताज को बचाने का रास्ता अदालतों से कम और किसानों के खेतों से अधिक होकर जाता है। यदि किसान वृक्ष लगाएगा तो ताज क्षेत्र हराभरा होगा, पर्यावरण सुधरेगा और ताजमहल की सुरक्षा भी और मजबूत होगी।”

विशेष संवाददाता

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