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“स्वच्छता के नाम पर मिट्टी का प्राकृतिक सुरक्षा कवच (Mulch) हटाना बंद हो”पालीवाल पार्क को घोषित किया जाए ‘नो प्लास्टिक ज़ोन

पालीवाल पार्क में विशेष स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान आयोजित

आगरा: रविवार 24 मई 2026

आगरा के ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक धरोहर स्वरूप पालीवाल पार्क को प्लास्टिक मुक्त, स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के उद्देश्य से आज प्रातः 7:00 बजे से 9:00 बजे तक पालीवाल पार्क के प्रातःकालीन भ्रमणकारियों द्वारा एक विशेष स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान आयोजित किया गया।

यह अभियान समाजसेवी डॉ. संजीव गोयल के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं एवं बच्चों ने सहभागिता की। मुख्य सहभागिता थी डी पी सिंह, डीएफओ (सेवा निवृत) एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के सी जैन।

अभियान के दौरान पार्क में फैले प्लास्टिक, पॉलीथिन एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाने का कार्य किया गया तथा यह मांग उठाई गई कि पालीवाल पार्क को तत्काल प्रभाव से “नो प्लास्टिक ज़ोन” घोषित किया जाए। यह भी कहा गया कि पार्क में किसी भी प्रकार की प्लास्टिक सामग्री लाने एवं फेंकने पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। इसके लिए जगह जगह पर पार्क में बोर्ड भी लगाएं जाए।

सूखे पत्ते कचरा नहीं, मिट्टी का प्राकृतिक सुरक्षा कवच (Mulch) हैं”

अभियान के दौरान अधिवक्ता जैन ने यह महत्वपूर्ण विषय भी प्रमुखता से उठाया गया कि पालीवाल पार्क में स्वच्छता के नाम पर पेड़ों के नीचे गिरे हुए सूखे पत्तों एवं प्राकृतिक सुरक्षा कवच (Mulch) को हटाया जा रहा है, जो पूर्णतः गलत एवं पर्यावरण विरोधी है।उपस्थित पर्यावरण प्रेमियों से कहा कि पेड़ों के नीचे गिरे हुए सूखे पत्ते मिट्टी के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच (Mulch) का कार्य करते हैं। यह प्राकृतिक जैविक परत मिट्टी की नमी बनाए रखती है, उसकी उर्वरता बढ़ाती है, पेड़ों की जड़ों को गर्मी से बचाती है तथा पर्यावरण संतुलन एवं जैव विविधता को मजबूत करती है।

यदि इन सूखे पत्तों को लगातार हटाया जाएगा तो मिट्टी कमजोर होगी, पौधों की प्राकृतिक वृद्धि प्रभावित होगी तथा पार्क की जैव विविधता को नुकसान पहुंचेगा। यह भी कहा गया कि विश्व के विकसित देशों एवं भारत के अनेक बड़े शहरों में प्राकृतिक Mulch को संरक्षित किया जाता है, जबकि यहां अनावश्यक सफाई के नाम पर उसे हटाया जा रहा है।

दिल्ली के पार्कों की तर्ज पर हो वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन

अभियान में डी पी सिंह में यह सुझाव भी प्रमुखता से रखा गया कि दिल्ली सहित देश के अनेक बड़े शहरों के पार्कों में बागवानी अपशिष्ट एवं सूखी पत्तियों के वैज्ञानिक निस्तारण हेतु विशेष ऊंचे ढांचे (Raised Structures) बनाए गए हैं, जिन पर जाली (Net) लगाकर पत्तियों एवं जैविक अपशिष्ट को सुरक्षित रखा जाता है। समय के साथ वही अपशिष्ट उच्च गुणवत्ता की प्राकृतिक कम्पोस्ट में परिवर्तित हो जाता है, जिसका उपयोग पुनः पार्क के पौधों एवं वृक्षों में किया जाता है।

उपस्थित लोगों ने कहा कि पालीवाल पार्क में भी इसी प्रकार की वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे पार्क में गंदगी न फैले, जैविक अपशिष्ट का सदुपयोग हो तथा प्राकृतिक खाद के माध्यम से हरियाली और अधिक समृद्ध हो सके।

प्लास्टिक हटे — प्रकृति बचे”

अभियान में यह संदेश दिया गया कि वास्तविक सफाई का अर्थ प्राकृतिक तत्वों को हटाना नहीं, बल्कि प्लास्टिक एवं गैर-जैविक कचरे को समाप्त करना है। पार्क में प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन, पैकेट एवं डिस्पोजेबल सामग्री पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं और मिट्टी, पक्षियों एवं अन्य जीवों के लिए खतरा बनती हैं। हरप्रीत नंदा ने नागरिकों से अपील की है कि वे पार्क को अपने घर के समान समझें और वहां पूर्ण स्वच्छता एवं अनुशासन बनाए रखें।

पालीवाल पार्क हमारा है — इसकी स्वच्छता और हरियाली हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”बच्चों के लिए सुरक्षित एवं जीवंत पार्क बने

अभियान में यह भी कहा गया कि पार्क केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि बच्चों, परिवारों एवं समाज के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का केंद्र है। बच्चों को स्वच्छ, हरित एवं सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए जहां वे खेल सकें, प्रकृति को समझ सकें तथा झूले, सी-सॉ (Seesaw) एवं अन्य गतिविधियों का आनंद ले सकें।यदि हम पार्कों को प्लास्टिक एवं प्रदूषण से मुक्त रखेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के साथ जुड़ाव महसूस कर सकेंगी।

सामुदायिक सहभागिता ही समाधान

अभियान में उपस्थित लोगों ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक स्थल को सुंदर एवं स्वच्छ बनाए रखने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। जब तक नागरिक स्वयं जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक स्थायी परिवर्तन संभव नहीं होगा।पालीवाल पार्क आगरा की पहचान है और इसे स्वच्छ, हरित एवं प्राकृतिक स्वरूप में सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

कार्यक्रम के अंत में डी पी सिंह को अंकोल का पोधा भेंट किया गया। कार्यक्रम में किशोर जैन, डॉक्टर आदित्य राय, डॉ मानसी राय, अनिल अग्रवाल, संजय अग्रवाल, हेमेन्द्र अग्रवाल, रवि शंकर अग्रवाल आदि लगभग ने बड़ी संख्या ने भाग लिया।

न्यूज़ डेस्क

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