युक्तिकरण के बाद उत्तर प्रदेश में मतदान केंद्रों की संख्या 1,73,730 हो गई है
‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ (Special Summary Revision) के तहत मतदाता सूचियों का मसौदा (draft) अब आयोग द्वारा स्वीकृत 1,73,730 मतदान केंद्रों पर प्रकाशित किया जाएगा
सभी स्वीकृत मतदान केंद्रों की सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाएगी
लखनऊ, 04 नवंबर, 2026
भारत निर्वाचन आयोग ने 04 नवंबर, 2026 को राज्य के 75 जिलों में स्थित सभी 403 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान केंद्रों के युक्तिकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव प्रति मतदान केंद्र 1,200 मतदाताओं के निर्धारित मानक के आधार पर तैयार किया गया था। राज्य में मतदान केंद्रों के युक्तिकरण की प्रक्रिया 16 अक्टूबर, 2026 से शुरू हुई थी। सभी जिलों से प्राप्त प्रस्तावों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मंजूरी के लिए भारत निर्वाचन आयोग को भेजा गया था।
युक्तिकरण से पहले राज्य में कुल 1,77,516 मतदान केंद्र थे, जिनकी संख्या अब घटकर 1,73,730 रह गई है। इस प्रकार, युक्तिकरण के बाद राज्य में कुल 3,786 मतदान केंद्र कम हो गए हैं। 01 जनवरी, 2027 की अर्हता तिथि (qualifying date) को ध्यान में रखते हुए चलाए जा रहे ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ कार्यक्रम के तहत, मतदाता सूचियों का मसौदा अब आयोग द्वारा स्वीकृत 1,73,730 मतदान केंद्रों पर प्रकाशित किया जाएगा।
सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि युक्तिकरण के परिणामस्वरूप आयोग द्वारा स्वीकृत मतदान केंद्रों पर बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLOs) की तैनाती की जाए। जिन मतदाताओं के मतदान केंद्र बदले गए हैं, उन्हें संबंधित BLO के माध्यम से लिखित रूप में सूचित किया जाएगा। BLO सुपरवाइज़र इस काम की नियमित निगरानी करेंगे, और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) तथा असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) व्यक्तिगत रूप से इसका सत्यापन करेंगे।यह भी निर्देश दिया गया है कि BLO यह सुनिश्चित करें कि एक ही परिवार के सभी सदस्यों के नाम मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) के एक ही भाग में दर्ज हों।
ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद, यदि किसी मतदाता का नाम परिवार के अन्य सदस्यों से अलग किसी दूसरे मतदान केंद्र पर दर्ज पाया जाता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ‘फॉर्म-8’ के माध्यम से आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
जिला निर्वाचन अधिकारियों और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे आयोग द्वारा ‘रैशनलाइजेशन’ (तर्कसंगत पुनर्गठन) के तहत स्वीकृत सभी मतदान केंद्रों की सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराएं। साथ ही, संबंधित क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि प्रत्येक मतदाता को अपने नए या बदले हुए मतदान केंद्र के बारे में समय पर जानकारी मिल सके और मतदान के दौरान उन्हें कोई असुविधा न हो।
लखनऊ ब्यूरो









