सादगी, स्वाभिमान, साधना, करुणा और देशभक्ति का जीवंत स्वरूप थे डॉ. इंद्रपाल सिंह ‘इंद्र’
वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. इंद्रपाल सिंह ‘इंद्र’ की जयंती पर किया गया उनका भावपूर्ण स्मरण
साहित्य साधिका समिति सँग डॉ. इंद्रपाल सिंह ‘इंद्र’ स्मारक समिति ने यूथ हॉस्टल में जयंती समारोह किया आयोजित
आगरा: मंगलवार 2 जून, 2026
साहित्य साधिका समिति सँग डॉ. इंद्रपाल सिंह ‘इंद्र’ स्मारक समिति द्वारा रविवार शाम यूथ हॉस्टल में वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद् डॉ. इंद्रपाल सिंह ‘इंद्र’ का जयंती समारोह मनाया गया। समारोह में आगरा, लखनऊ, दिल्ली और ग्वालियर सहित देश के जाने-माने साहित्यकारों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने डॉ. इंद्र का भावपूर्ण स्मरण किया।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. इंद्र सादगी, सरलता, सौम्यता, स्वाभिमान, साधना, सर्जना, आत्म सम्मान, दृढ़ निश्चय, प्रेम, करुणा, भावुकता और देशभक्ति का जीवंत स्वरूप थे। उन्होंने कई पीढ़ियों को हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य के संस्कार दिए।
इससे पूर्व समारोह-अध्यक्ष डॉ. खुशीराम शर्मा, मुख्य अतिथि डॉ. उपासना सिंह (दिल्ली), विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार शीलेंद्र कुमार वशिष्ठ, डॉ. मिथिलेश दीक्षित (लखनऊ), डॉ. मधुलिका सिंह (ग्वालियर) और कार्यक्रम संयोजक आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. सुषमा सिंह ने माँ शारदे और डॉ. इंद्र की तस्वीर पर माल्यार्पण व समक्ष दीप जलाकर समारोह का शुभारंभ किया। सभी अतिथियों ने मिलकर डॉ. इंद्र द्वारा रचित देवी चरित्र और डॉ. सुषमा सिंह की पुस्तक समीक्षायन का लोकार्पण किया।
*डॉ. इंद्र का साहित्यिक अवदान प्रशंसनीय*
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. खुशीराम शर्मा ने कहा कि प्रिय भाई डॉ. इंंद्र पाल सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने अपनी साधना, लगन और निष्ठा से हिन्दी जगत में श्रेष्ठ साहित्य की रचना की। उनकी हिन्दी सेवा के प्रभाव स्वरूप अनेक लोग साहित्य सृजन में संलग्न हुए।
उन्होंने कहा कि मेरा और डॉ.इंद्र का नागरी प्रचारिणी सभा और हिन्दी के अध्यापन से जुड़ाव के कारण घनिष्ठ संबंध रहा जो नागपुर विश्वविद्यालय से अवकाश ग्रहण कर उनके आगरा आ जाने से पुनर्जीवित हो गया। मैं उनके साहित्यिक अवदान का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ।
मुख्य अतिथि दिल्ली की साहित्यकार डॉ. उपासना सिंह ने कहा कि डॉ. इंद्र की पुस्तक ‘देवी चरित्र’ संस्कृत की ‘दुर्गा सप्तशती‘ का काव्यानुवाद होते हुए भी मौलिक रचना का आनन्द प्रदान करती है।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार शीलेंद्र कुमार वशिष्ठ ने कहा कि इंद्रपाल सिंह ‘इंद्र’ ने अपने परिश्रम और अपनी प्रतिभा बल से शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। आपने अपने शिष्यों और अपने साहित्य के माध्यम से हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य की ऐतिहासिक रूप से सेवा की। आपका साहित्यिक अवदान हिंदी साहित्य की धरोहर है।
साहित्य साधिका समिति की संस्थापक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुषमा सिंह, श्रीमती रमा वर्मा ‘श्याम’ और अध्यक्ष डॉ. रेखा कक्कड़ ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. मंजू स्वाती ने माँ शारदे की वंदना प्रस्तुत की। सचिव डॉ. यशोधरा यादव ‘यशो’ ने समारोह का संचालन किया।
इस दौरान डॉ. नीलम भटनागर, डॉ. कुसुम चतुर्वेदी, डॉ. मिथिलेश पाठक, डॉ. शेषपाल सिंह, सुशील सरित, अशोक अश्रु, साधना वैद, परमानंद शर्मा, महेश शर्मा, डॉ. विनोद माहेश्वरी, विजय तिवारी, रवींद्र वर्मा, डॉ. राजेश पाल सिंह धाकरे, डॉ. प्रेरणा आदित्य सिंह और सुधा परिहार सहित तमाम महनीय साहित्यकार और शिक्षाविद् उपस्थित रहे।
न्यूज़ डेस्क









