यूपी में सात मई से जनगणना के तहत खुद ही ऑनलाइन विवरण भरने का विकल्प मिलेगा
लखनऊ: रविवार 3 मई 2026
डेढ़ दशक बाद होने जा रही जनगणना का पहला चरण यानी हाउस सर्वे 22 मई से उत्तर प्रदेश में शुरू होगा। इससे पहले 7 मई से स्वणगना यानी खुद ही ऑनलाइन सारा विवरण भरने का विकल्प मिलेगा। इस दौरान 33 बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें वाहन भी शामिल है। सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों की इस गिनती में कार, जीप और वैन तो शामिल है लेकिन ट्रैक्टर, ई-रिक्शा जैसे वाहन इस कॉलम में नहीं भरे जाएंगे।
जनगणना कार्य निदेशालय की ओर से प्रदेशभर में सुपरवाइजर, प्रगणक एवं अन्य स्टॉकहोल्डर्स का प्रशिक्षण करवाया जा रहा है।
किराए पर हैं तो कहीं और घर है क्या?
2011 की जनगणना के दौरान आम तौर पर यह पूछा जाता था कि आप जिस घर में रह रहे हैं वह किराए का है, अपना है या किसी अन्य माध्यम से यहां रह रहे हैं? इस पर यह भी जानकारी जुटाई जाएगी कि अगर आप किराए पर रह रहे हैं तो कहीं आपका अपना आवास भी है क्या? इस सवाल का विस्तार करने की वजह आवास की आवश्यक आवश्यकताओं का आंकलन करना है जिसके आधार पर आवासीय योजनाओं की आगे दिशा तय होगी।
जनगणना में यूं तो हर निवासी की जाति गिनी जाएगी, लेकिन, हाउस सर्वे के दौरान भी परिवार का मुखिया एससी/एसटी या अन्य जाति का है इसका विवरण जुटाएगा। इसमें एससी और एसटी के लिए अलग कालम होगा, बाकी की गिनती अन्य में होगी। यह भी बताया जा रहा है कि एससी में केवल हिंदू, सिख एवं बौद्ध धर्म के अनुयायी शामिल होंगे, एसटी में अन्य की भी गणना हो सकती है।
पिछली जनगणनाओं के अनुभव को देखते हुए प्रशिक्षण में संवाद बेहतर करने एवं जनता को समझा कर जानकारी प्राप्त करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सवालों की प्रकृति को देखते हुए बहुत बार लोग जानकारी देने से मना कर करते है, इस स्थिति का सामना कैसे करना है इसके लिए लाइव डेमो भी करवाया जा रहा है। उत्तरदाताओं को आश्वस्त किया जाएगा कि इस जानकारी का उपयोग केवल आंकड़े जुटाने के लिए ही किया जा रहा है न कि किसी अन्य प्रयोजन के लिए।
जनता को समझाने पर जोर क्यों?
जनगणना 2027 का पहला चरण शुक्रवार से शुरू हो गया है। इसमें नागरिकों को पहली बार ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प मिला है। इस अभियान के तहत 15 मई तक लोग मोबाइल ऐप या पोर्टल के जरिए अपने परिवार की जानकारी खुद भर सकते हैं। इसके बाद 16 मई से गणनाकर्मी घर-घर जाकर मकानों की सूची बनाने का काम करेंगे। केंद्र सरकार ने नागरिकों को दी गई जानकारी की सटीकता के बारे में चेतावनी जारी की है।
जनगणना 2027: 33 सवालों के गलत जवाब? जुर्माना, कानूनी कार्रवाई और ज़रूरी नियम जो आपको पता होने चाहिए।
भारत की डिजिटल जनगणना 2027 पहले चरण में 33 सवालों के साथ शुरू हो रही है। गलत जानकारी देने या मना करने पर जनगणना अधिनियम के तहत जुर्माना लग सकता है—जवाब देने से पहले जुर्माने, कानूनी नियमों और पूछे जाने वाले सवालों के बारे में जान लें।
जनगणना 2026: 33 सवालों के गलत जवाब?
जुर्माना, कानूनी कार्रवाई और ज़रूरी नियम जो आपको पता होने चाहिए। आने वाली इस प्रक्रिया के लिए अपडेट किए गए फ्रेमवर्क के तहत, 33 तय सवालों में से किसी का भी गलत जवाब देना या अधिकारियों को जान-बूझकर गुमराह करना भारी जुर्माने, कानूनी कार्रवाई और सरकारी रिकॉर्ड में हमेशा के लिए दर्ज होने का कारण बन सकता है। गलत जानकारी की कीमत डेटा की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार जनगणना अधिनियम के प्रावधानों को सख्ती से लागू कर रही है।
अधिकारियों ने साफ किया है कि जहां अनजाने में हुई गलतियों को सुधारा जा सकता है, वहीं जान-बूझकर गलत जानकारी देना एक दंडनीय अपराध है।नियमों का पालन न करने या गलत जानकारी देने पर ये दंड मिल सकते हैं। जो लोग जवाब देने से मना करते हैं या साफ तौर पर गलत डेटा देते हैं, उन पर तुरंत प्रशासनिक जुर्माना लगाया जाएगा।जनगणना अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाएगा, जिससे संगठित तरीके से डेटा में हेरफेर करने के गंभीर मामलों में जेल भी हो सकती है।विसंगतियों (गलतियों) की पहचान करने के लिए आधार और पैन जैसे मौजूदा डेटाबेस के साथ डिजिटल क्रॉस-रेफरेंसिंग की जाएगी।
33 सवाल: आपको क्या जानने की ज़रूरत है?
2027 की जनगणना में 33 खास बिंदुओं वाली एक प्रश्नावली शामिल होगी। इनमें जनसांख्यिकी के कई पहलू शामिल हैं, जैसे बुनियादी सुविधाओं (बिजली, पानी, साफ़-सफ़ाई) तक पहुँच, शैक्षिक योग्यता, रोज़गार की स्थिति और डिजिटल साक्षरता।पहली बार, भारत के ‘डिजिटल डिवाइड’ (डिजिटल असमानता) का पता लगाने के लिए डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल और स्मार्टफ़ोन के उपयोग से जुड़े सवालों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।
नागरिकों के लिए मुख्य नियम
कानूनी उलझनों से बचने के लिए, सरकार ने आम जनता के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
1. घर के हर मुखिया के लिए जनगणना अधिकारी को जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
2. जहाँ एक ओर नागरिक का ईमानदार होना ज़रूरी है, वहीं दूसरी ओर सरकार भी व्यक्तिगत डेटा को गोपनीय रखने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
3. जनगणना के डेटा का इस्तेमाल किसी भी अदालत में किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ सबूत के तौर पर नहीं किया जा सकता।
4. नागरिकों को ‘सेल्फ़-एन्यूमरेशन पोर्टल’ (स्वयं-गणना पोर्टल) का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है; इस पोर्टल की मदद से परिवार जनगणना अधिकारी के आने से पहले ही 33 सवालों के जवाब ऑनलाइन भर सकते हैं, जिससे मौखिक रूप से जानकारी देते समय होने वाली गलतियों की गुंजाइश कम हो जाती है।
स्थानीय क्षेत्रों की सीमाओं के भीतर भारत की जनगणना 2027 के संबंध में मकान सूचीकरण तथा मकानों की गणना अनुसूचियों के माध्यम से जानकारी एकत्र करने के लिए नीचे प्रगणित मदों के संबंध में सभी व्यक्तियों से इस प्रकार के प्रश्न पूछे जायेंगे अर्थातः-
1. भवन नंबर (नगर या स्थानीय प्राधिकरण अथवा जनगणना नंबर)
2. जनगणना मकान नंबर
3. जनगणना मकान के फर्श में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री
4. जनगणना मकान के दीवार में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री
5. जनगणना मकान के छत में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री
6. जनगणना मकान के उपयोग
7. जनगणना मकान की हालत
8. परिवार क्रमांक
9. परिवार में सामान्यतः रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या
10. परिवार के मुखिया का नाम
11. परिवार के मुखिया का लिंग
12. क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य से संबंधित है
13. मकान के स्वामित्व की स्थिति
14. परिवार के पास रहने के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या
15. परिवार में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या
16. पेयजल का मुख्य स्रोत
17. पेयजल स्रोत की उपलब्धता
18. प्रकाश का मुख्य स्रोत
19. शौचालय की सुलभता
20. शौचालय का प्रकार
21. गंदे पानी की निकासी
22. स्रानगृह की उपलब्धता
23. रसोईघर और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता
24. खाना पकाने के लिए प्रयुक्त मुख्य ईंधन
25. रेडियो/ट्रांजिस्टर
26. टेलीविजन
27. इंटरनेट सुविधा
28. लैपटॉप/कंप्यूटर
29. टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्ट फोन
30. साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड
31. कार/जीप/वैन
32. परिवार द्वारा उपभोग किया जाने वाले मुख्य अनाज
33. मोबाइल नंबर (केवल जनगणना संबंधी संसूचना के लिए)
2027 की जनगणना का कार्य प्रारंभ हो चुका है, अधिकारी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि सटीक डेटा उपलब्ध कराना एक नागरिक कर्तव्य है। यह अगले दस वर्षों के दौरान संसाधनों के निष्पक्ष वितरण और कल्याणकारी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
न्यूज़ डेस्क









