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खुशी – एक मंजिल नहीं, एक यात्रा है: “अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस” पर इस्मा ट्रस्ट द्वारा गोष्ठि आयोजित

आगरा: मंगलवार 24 मार्च 2026

क्या खुशी कोई उपलब्धि है, या फिर यह एक निरंतर प्रक्रिया है? क्या हम खुश रहना सीखते हैं, या दुखी होना? अक्सर हम यह मान लेते हैं कि खुशी किसी उपलब्धि या वस्तु की उपलब्धता पर निर्भर है – जब हमें वह उपलब्ध होगी तब ही हम खुश होंगे। परंतु सच्चाई इससे अलग है।

इस विषय को लेकर अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस (20 मार्च) के अवसर पर इस्मा ट्रस्ट के तत्वावधान में डॉ. चीनू अग्रवाल द्वारा कार्यक्रम आयोजित हुआ।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि हम कई बार सीखी हुई असहायता (लर्नड हेल्पलेसनेस) के कारण खुश नहीं रह पाते। एक उदाहरण इसे बहुत सुंदर ढंग से समझाता है – जब एक छोटे हाथी को लोहे की भारी जंजीरों से बांधा जाता है, तो वह लाख कोशिशों के बाद भी खुद को छुड़ा नहीं पाता। धीरे-धीरे वह मान लेता है कि वह बंधन तोड़ नहीं सकता। जब वही हाथी बड़ा हो जाता है, तब उसे केवल एक पतली सूती रस्सी से बांधा जाता है – जो वह आसानी से तोड़ सकता है, लेकिन वह प्रयास ही नहीं करता। क्योंकि उसने असहाय होना सीख लिया है। हम भी कई बार उसी हाथी की तरह होते हैं – हम अपनी सोच के बंधनों में बंधे रहते हैं और खुश रहना भूल जाते हैं।

खुशी – मंजिल नहीं, यात्रा हैजीवन एक यात्रा है, कल्पना कीजिए, दो बच्चे एक ट्रेन में सफर कर रहे हैं – एक बच्चा खिड़की से बाहर देख रहा है, हर दृश्य का आनंद ले रहा है, हर स्टेशन को महसूस कर रहा है। दूसरा बच्चा केवल इस प्रतीक्षा में है कि कब मंजिल आएगी। पहला बच्चा यात्रा का आनंद ले रहा है, दूसरा बच्चा सिर्फ मंजिल का इंतजार कर रहा है। अक्सर हम भी दूसरे बच्चे की तरह हो जाते हैं – और इस कारण जीवन की यात्रा का आनंद खो देते हैं।

खुशी का असली आधार क्या है?बहुत लोग सोचते हैं कि खुशी इन चीजों से आती है – पैसा, लंबी आय, स्वतंत्रता, संस्थाओं पर भरोसा परंतु अनुभव और शोध यह बताते हैं – सबसे महत्वपूर्ण है सामाजिक सहयोग एक ऐसा समाज, जहाँ अपनापन और सहयोग हो यही हमें सुरक्षा और सच्ची खुशी का एहसास कराता है।

खुशी के तीन स्तरएक प्रयोग के अनुसार, खुशी के तीन स्तर होते हैं – सुख सुविधाओं वाला जीवन जैसे अच्छा भोजन, आराम, भौतिक सुख, लेकिन यह क्षणिक और परिस्थितियों पर निर्भर होता है, दूसरा स्तर अपने कार्य में व्यस्त रहना, जब हम किसी काम में इतने डूब जाते हैं कि समय का पता ही नहीं चलता और तीसरा स्तर है अर्थपूर्ण जीवन किसी उद्देश्य के साथ जीवन जीना जैसे जब हम अपने जीवन को दूसरों की सेवा और समाज के लिए समर्पित करते हैं। यही तीसरा स्तर सबसे गहरी और स्थायी खुशी देता है।

खुशी कोई तैयार चीज नहीं है – यह हमें स्वयं बनानी पड़ती है। खुशी एक प्रक्रिया है,, एक चयन है, एक प्रयास है इसलिए – खुश रहने का इंतजार मत कीजिए, खुश रहना शुरू कीजिए। कार्यक्रम में किशोर खन्ना, डा0 सुशील गुप्ता, अधिवक्ता के0सी0 जैन, कनक जैन, सलभ गुप्ता आदि सम्मिलित थे।

न्यूज़ डेस्क

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